प्रेम अनुराग

सुन्‍दर रूप प्रेम अनुराग से हर लिया मेरा मन है
बदला मौसम खिल गये नैना हुआ उनका आगमन है
चंचल करती उसकी मधुर बोली हूँ सुनने को आतुर
दूर भला में कैसे जाऊँ लगता उनमे अब अपनापन है
अभिषेक शर्मा अभि
स्वंयरचित रचना सर्वाधिकार प्राप्त

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5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 06/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/09/2016
  5. Kajalsoni 06/09/2016

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