न सुधरा है इन्सान

फितरत मे इन्सान के बसी है नाफरमानी ।

छोडदी जन्नत उसने पर न छोडी मनमानी।

तकब्बुर मे करता है कमब्खत हरदम नादानी।

फना होगये कई रुस्तम तवंगर बनगये कहानी।

चलती रहेंगी दुनिया खत्म होती रहेंगी जिन्दगानी।

न सुधरा है इन्सान न सुधरने की कोई निशानी।
(आशफाक खोपेकर)
?????????????????????????????❤???❤???❤???❤???

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/09/2016
  2. babucm C.m sharma(babbu) 06/09/2016
  3. Kajalsoni 06/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/09/2016
  5. mani mani 06/09/2016

Leave a Reply