तुम्हारे आने से…

तुम्हारे आने से-
खिल गये आशाओं और कामनाओं के फूल
मन के आँगन और गलियारे में…

सुलझ गई मन की सारी
गुत्थियाँ हल हो गए जीवन के सारे सवाल…

उदास होठों पर थिरक उठा
जीवन का मधुर संगीत…

प्रफुल्लित हो उठा मन
सच हो उठा मानो भिनसरहा का स्वप्न…

खिल उठी मखमली धूप
मन की देहरी में
वर्षों की अमावस रात के बाद…

गुनगुनाने लगी बरबस ही खामोशियाँ
कदमों में आज मेरे
झुक गई जैसे आकाश की ऊँचाईयाँ…

मिट गई चाह दादी अम्मा के
साध हो गए पूरे सभी
बस देखकर एक झलक तुम्हें…

बेफिक्र हो गई अम्मा
घर-करनी और तमाम घरेलू-उलझनों से…

व्यवस्थित हो गया एक अदद मकान
मुखर हो उठी घर की दीवारें देखते ही देखते
उजास से भर गया घर का हर कोना
तुम्हारे आने से…


डॉ. विवेक कुमार

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/09/2016
  3. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 06/09/2016
  4. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 06/09/2016
  5. Kajalsoni 06/09/2016
  6. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 06/09/2016

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