हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

तेरी गोद में छोरों को चूसने की मिठास
लोरी के सुरों से बढती सपनों की प्यास
झरोखे में चाँद तारों की दुनिया वो खास
प्यार की सौंधी सुगंध से होता मन चंचल

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

घूँघट के छाँव में शर्म का खिलखिलाना
होंठों से दबा कर नज़रों से बतियाना
या उच्श्रृंखल बहकते उमंगों सा लहराना
यौवन के वादी में तितलियों की हलचल

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

कोडों सी बरसती तपिश के बाद
सुनहरी लालिमा ओढ़े आई फरियाद
भीगे प्रीति वन में आस्था मयुर का उन्माद
शांति की बेलों पर खिले खुशी के कमल

हर शाम मुझे मिला है तेरा आँचल

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
    • Uttam Uttam 05/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/09/2016
    • Uttam Uttam 05/09/2016
  3. Kajalsoni 05/09/2016
    • Uttam Uttam 05/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 05/09/2016
    • Uttam Uttam 05/09/2016

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