मेरा सारा बचपन छूट गया

बागों की अमराई को,
खेतो की अलसी राई को
भीगी माटी की खुशबू को
जब इत्र की खुशबू लूट गया
मेरा सारा बचपन छूट गया!
छूट गए मेरे खेल खिलौने
छूटी अमवा की छइयां
छूट गया माटी का घर
और छूटी धौली गइया
सोने के रथ पर आया सपना
सब कुछ मेरा लूट गया
मेरा सारा बचपन छूट गया!
उस दिन,
जब गेहू की चुभती बाली से
उस कांसे वाली थाली से
और अपने अम्मा की गाली से
जब मैं रूठ गया
मेरा सारा बचपन छूट गया!
अम्बिकेश

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
    • ambikesh ambikesh 05/09/2016
    • ambikesh ambikesh 06/09/2016
    • ambikesh ambikesh 06/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/09/2016
  3. Kajalsoni 05/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 06/09/2016

Leave a Reply