सोचता हूँ, “क्या लिखूँ”

जब भी लिखने बैठता हूँ, सोचता हूँ क्या लिखूँ
ऐ जिंदगी तू ही बता, मैं क्या लिखूँ – मैं क्या लिखूँ
जीवन का सार लिखूँ या कोई मलिहार लिखूँ
तू ही बता, मैं क्या लिखूँ-मैं क्या लिखूँ”
माँ का दुलार लिखूँ या सजनी का प्यार लिखूँ
पापा की फटकार लिखूँ या गुरु की मार लिखूँ
ऐ जिंदगी तू ही बता मैं क्या लिखूँ- मैं क्या लिखूँ
वो भाई का प्यार लिखूँ या दोस्तों का रूठना मनाना लिखूँ
वह वक़्त का प्यार लिखूँ या फिर उसकी दुत्कार लिखूँ
ऐ जिंदगी तू ही बता मैं क्या लिखूँ……….

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/09/2016
  2. babucm babucm 05/09/2016
  3. Kajalsoni 05/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
    • Muzibur Rahman 07/09/2016
  5. Muzibur Rahman 07/09/2016

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