वक़्त कैसे बदलोगे

वक़्त कैसे बदलोगे

वो असामन पर उड़ने वालो की बात करते है,
हमारे लहज़े पर सवाल करते है.
अंदाज़ उनका आज के ज़माने का है,
हम वही पुराने ख्यालात की बात करते है.

घड़ी का समय बदल सकते हो,
सुई नहीं बदल पाओगे,
ज़िंदगी को आइने में देखने की कोशिश करते हो,
वो बुज़ुर्ग वो खिलौने वो दुलार कहाँ से लाओगे.

ज़मीन को देखो कितना हुस्न देखा है,
चाँद को सूरज से मिलता हुआ देखा है,
पानी की एक बूँद पाने के लिए,
क़त्ल, बेबसी, लाचारी, ज़ुल्मत को देखा है.

दानिश मिर्ज़ा

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/09/2016
  2. SHIVANI PANT 11/03/2018

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