हाय ! रे जियो -पियुष राज

हाय ! रे ‘जियो’

हाय रे जियो
ये क्या कियो
जब खेल के महाकुम्भ में
डूबा था पूरा रियो
उस समय हमारे देश में
सब ढूंढ रहे थे जियो

हमारे देश की बेटियां
जब खेल रही थी रियो में
तब हमारे देश के बेटे
डूबे हुए थे जियो में

मुफ़्त डेटा पाने का
सब को चढ़ा बुखार
काम-काज सब छोड़ के
करने लगे जुगाड़

नेट की दीवानगी सब पे
कुछ इस कदर है सवार
निगाहें रहती है फोन में तब भी
जब करते है सड़क पार

जियो ने भारतवासी को
डेटा का लड्डु खिला दिया
बाकी टेलीकॉम कंपनियो को
जड़ से पूरा हिला दिया
सस्ते प्लान लाकर
हर ग्राहकों को लुभा लिया
जो नही कर सका कोई
अंबानी ने करके दिखा दिया

जियो के आगे भी
अभी बहुत है कहानी
काम करो कुछ ऐसा कि
तुम भी बन जाओ अंबानी

©पियुष राज,दुधानी, दुमका ।
(Poem. No-30) 03/09/2016

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4 Comments

  1. Saviakna Saviakna 04/09/2016
  2. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 04/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/09/2016
  4. Kajalsoni 05/09/2016

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