आयाम रचना है “” “”””” “” सविता वर्मा

क्षितिज का वह छोर जहां जाकर अंधेरा भी अनन्त रोशनी से लबालब हो जाये, ऐसा प्रकाश से भरा गधाशं रचना है।
आजमाइश न हो खिलखिलाहटो की जब मेरी पंक्तियाँ कोई पढे, ऐसी मिट्टी की महक और अल्हड़ता का मिजाज रचना है।
कविताओं की अपनी जिन्दादिली, कविताओं में होती खुबसुरती, ऐसी खुबसुरती और जिन्दादिली का आयाम रचना है।
उगते सूरज की तपन हो जिसमें, गरमाहट से लबरेज होठों पर अल्फाज़ो का भावार्थ रचना है।
विलग हो रहे अक्षरों और शब्दों से भाव,भावको समर्पित कविता एकाध रचना है।।।।
सविता वर्मा