” सोच रही हूँ”….. काजल सोनी

सोच रही हूँ ,
क्या मैं लिखु ,
दिल के उस अफसाने को ।
ढुंढ रही हुं अपनी खातिर ,
अपने उस दीवाने को ।
आंखे जिसकी तीखी तीखी ,
करता जो दिल की बातें ,
नींद उड़ा कर देखें मुझको ,
दिल करता मर जाने को।

सोच रही हूँ
क्या मैं कह दु ,
उसके होश उडाने को।
प्यार भरी हर एक अदा है उसकी ,
दीवाना सा है पगला भी,
दिल के हर अरमान मचलते ,
चाहे दिल , संग उड़ जाने को ।

सोच रही हूँ
कैसे देखूँ ,
थाम के जो चलता है मुझको ,
है डरता दिल उससे ,
नजर मिलाने को ।
दिल भी गहरा बातें गहरी,
अपना सब कुछ मानु मैं ,
जाने क्यु उस बेगाने को ।।

“काजल सोनी ”

10 Comments

  1. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 04/09/2016
    • Kajalsoni 05/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/09/2016
    • Kajalsoni 05/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2016
    • Kajalsoni 05/09/2016
    • Kajalsoni 05/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
  5. Kajalsoni 05/09/2016

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