आंसू

ये आंसू भी कितने बदतमीज़ होते है
जब कहो इसे छुप जाने को
न जाने क्यूँ ये तभी दो लोगों के बिच सरीख होते हैं

बस छुड़ा ही रहा था मै उनसे अपने हाथ
समेट ही रहा था दो दिलों के जज्बात
आँखों को इसने आकर यूँ घेर लिया
छुपाना चाहा दर्द मैंने और नजरें फेर लिया
देख न पायी वो मुझे टूटता इस क़दर
और न चाहते हुए भी रोये हम खूब एक दुसरे से लिपटकर……

19 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  2. mani mani 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  6. babucm Cm sharma (babbu) 04/09/2016
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 09/09/2016
  8. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 09/09/2016
  9. Kajalsoni 04/09/2016
    • shrija kumari shrija kumari 09/09/2016

Leave a Reply