अधूरी प्रेम-कहानी-III

जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, अब उसकी आँखों में खौफ देखा करता था,
ना जाने किस बात से वो इतना डरा करती थी,कब्र पे मेरे आके दिन रात रोया करती थी,
उठकर रूह ने मेरी उससे ये पूछा था, जो लड़का तेरे साथ था, वो तेरा क्या लगता था,
“बचपन से पाला था मुझे, मेरा भाई वो लगता था”,
बातें सुनकर उसकी, मैं जड़ तलक काँप गया, प्यार में यारो मैं, ये कैसा गुनाह कर गया,
जल्दबाजी ने मेरा सुख चैन खो दिया, सब कुछ लूटा कर,जिन्दगी ने भी साथ छोड़ दिया,
मरकर जमाने को मैंने क्या बतलाया, क्या हालत होती है प्यार में, खुद समझ नही पाया,
जल्दबाजी का नतीजा जमाने को दिखलाया,
“रूह बनकर भटकना एक सजा है, औरों को इसकी सीख देना अब कज़ा है,
इश्मशान में बैठ तुझे ही याद किया करता हूँ, मुर्दों से अक्सर तेरी ही बातें किया करता हूँ,
सुनाया करता हू किस्सा तेरे मेरे प्यार का, तेरे इनकार का, कभी इजहार का,
यारो ये थी मेरी अधूरी सी प्रेम कहानी, मैं था अनजाना और वो थी दीवानी…
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समाप्तम..
शीतलेश थुल

19 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  3. shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  6. mani mani 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  7. babucm Cm sharma (babbu) 04/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
      • babucm babucm 05/09/2016

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