अधूरी प्रेम-कहानी-I

जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, साथ एक लड़का भी देखा करता था,
अपनी ही मस्ती में चूर दोनों, बांहों में बांहे डाला करता था,
इतना तो पहले कभी न मुस्कुराते देखा था,
जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, कभी मैं भी अपना प्यार वहा देखा करता था,
उसकी होंठो के नीचे का तिल, उसे दुनिया की नजरो से बचाया करता था ,
आँखों का गहरा काजल, उसकी पलकें सजाया करता था,
उसके पायल से बजती धुन पर, मैं मल्हार गाया करता था,
जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, साथ एक लड़का भी देखा करता था,
दोनों की हंसी मुस्काने , दिल देख देख रोया करता था…
.
.
.
To Be Continue
शीतलेश थुल

12 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  4. C.M. Sharma Cm sharma (babbu) 04/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  5. Kajalsoni 05/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 07/09/2016

Leave a Reply