जैसे कान्ह जान तैसे उद्धव सुजान आए

जैसे कान्ह जान तैसे उद्धव सुजान आए ,
हैँ तो मेहमान पर प्रान हैँ निकारे लेत ।
लाख बेर अँजन अँजाए इन हाथन सोँ ,
तिनको निरँजन कहत झूठ धारे लेत ।
ग्वाल कवि हाल ही तमालन मे बालन मे ,
ख्यालन मे खेले हैँ किलोल किलकारे लेत ।
ह्याँ न परचेरी जोग चेरी सँग पर चेरी ,
भेज परचेरी जोग परचे हमारे लेत ।

Leave a Reply