अजीब कहानी

यहाँ हर धर्म की इक अजीब कहानी है
अपना खून खून दूसरों का पानी है

वक़्त की गजब चाल को समझे भी कैसे
नफरत की गिरफ्त में यहाँ हर जवानी है

किसी के खून से जंगो का फैसला नहीं होता
कोई कांच को हीरा समझे तो उनकी नादानी है

बैठे हैं जो आज भी मोहब्बत के इंतज़ार में
मोहब्बत की गलियों में मगर अभी वीरानी है

भटक गए हैं जो नफरत के घुप अंधियारे में
चिराग ऐ मोहब्बत से जिंदगी में उनकी सहर लानी है

मज़हब की दीवारें मज़बूत हुई तो क्या
दिलों में बनी नफरत की दीवारें अब गिरानी है

बहुत सो चुका अब तो जागना ही होगा हितेश
अमन ओ चैन की लिखनी अब नयी कहानी है

हितेश कुमार शर्मा

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  3. shrija kumari shrija kumari 03/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
  5. mani mani 03/09/2016
    • Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 05/09/2016
  6. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 05/09/2016

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