बरसात के बादल

sheetbarsaat
एक अजीब सा रिश्ता जुड़ा है बरसात के साथ,
याद आ जाते है बीते पल, बीती बातो के साथ,
दूर कही उफ़्क से अब्र चले आते है,
संग अपने बीते पलों की यादें ले आते है,
बरसात की पहली बूँद, जब जमीं से टकराती है,
बीते पलों की यादों को ताजा कर जाती है,
बादलों की गडगडाहट, हुल्लड़पन याद दिलाते है,
मेंढक की टर्र टराहट, हमारा शोर मचाना बताते है,
सडको पे जमा पानी, जब पहियों से उछलता है,
कूदा करते थे हम भी कभी, आज भी मन मचलता है,
वो बिजली की कड़ कड़ाहट का कानो में गूंजना,
हमारा डर कर एक दुसरे को पकड़ लेना,
फिर एक भयंकर आवाज शोर गुल मचाती थी,
नयी चुस्ती नयी फुर्ती अंग अंग में भर जाती थी,
दूर कही उफ़्क से अब्र चले आते है,
बीते पलों की तस्वीर को कैद कर चले जाते है

तात्पर्य :- अब्र= बादल , उफ़्क= क्षितिज
शीतलेश थुल

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 03/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  3. mani mani 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 04/09/2016

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