शांत रहिये पार्ट – 1

शांत रहिये, शांत रहिये।
यह शब्द क्यों चुभने लगे है आज कल ,
क्या शांत रहने के लिए ही ,
ईश्वर ने दी थी जुबान।

क्या शांत रहने के लिए ,
माँ बाप ने सिखाई थी जुबान ,
या शांत रहने के लिए ही ,
शिक्षा ने दिए जुबाँ को नए नए शब्द।

यूँ तो मैं ज्यादातर तुम्हारे कहे अनुसार ,
शांत ही हो जाती हूँ , महज
शांत रहने के लिए नहीं ,
मगर शान्ति बनाये रखने के लिए।

माँ बाप ने पंख भी तो दिए थे,
आज जब पाँव थकने पर ,
उन्ही पंखो से उड़ना चाहती हूँ ,
कुछ नए पुराने ,तरह तरह
के लोगों से जुड़ना चाहतीं हूँ।

कुछ उनकी सुनना और
कुछ अपनी ,कहना चाहतीं हूँ।
तो तुम मुझे बार बार ही ,
शांत क्यों कर देते हो ?

अगर शांत ही करना था तो,
क्यों नहीं शांत होने दी थी ,
मेरे ह्रदय की धड़कन।

क्या मैं आजकल सचमुच ही ,
कुछ ज्यादा ही बोल रहीं हूँ ,
नही ,मैं शायद अपने विचारों को ,
शब्दों में तोल रहीं हूँ।

मैं यह अच्छी तरह जानती हूँ कि ,
मुझे यूँ इस तरह शांत कराने के पीछे ,
तुम्हारा कोई दुर्भाव नहीं है ,
बल्कि परवाह है कि लोग ,
मेरा मजाक ना बनाने लगें।

यह भी मानती हूँ कि यह भी तुम्हारा ,
मेरे प्रति बिना दिखाए प्रेम है ,अपनापन है ,
मगर तुम भी यह क्यों नही समझते,
कि मेरा भी अपना कुछ मन है।,

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 03/09/2016
    • Manjusha Manjusha 03/09/2016
    • Manjusha Manjusha 03/09/2016
    • Manjusha Manjusha 05/09/2016
  3. mani mani 03/09/2016
    • Manjusha Manjusha 05/09/2016
      • Archana 05/09/2016
        • Manjusha Manjusha 06/09/2016

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