शीतल हवा।

आज फिर से वही शीतल हवा
उठ कर पूर्व से आई है।
सर्दी को ले आगोश में
तन से मेरे टकराई है।
इसमंे महकती फूलों की खुषबू
सांसों को सुवाषित करती
मन प्रफुल्लित हो उठता।
तन को जैसे ताजा करती।
मुझको ये बाहों में भरती।
आंखें इसकी ललचाई हैं।
आज फिर से वही शीतल हवा
उठ कर पूर्व से आई है।
चंचल चितवन ओढें घूघंट
संग लेकर पत्तों का झुरमुट
आंखें मुंदे अंधी होकर
मन में प्रियतम का मिलन
ऐसी भोली-भाली सूरत
लेकर के चली आई है।
आज फिर से वही शीतल हवा
उठ कर पूर्व से आई है।
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