बेवफा-ए-मोहब्बत-II

sheethul
मैंने तेरी हर बात पे हामी भरी, चाहे मुझे मंजूर हो या नहीं भी ,
तेरे इख्लास की इक़्तिज़ा में इज़्तिरार इतना के ,
मैंने बिन इख्त़ियार के इतिबार करी ,
तेरे इताब और इज़्तिराब से हैरान हूँ मैं ,
इत्तिहाम का इत्तिका लेकर तेरे साथ खड़ा हूँ भी और नहीं भी ,
इन्तिक़ाम का इन्क़िलाब भी इद्राक से लीजिये हुजुर ,
इक़बाल-ए-इक़रार मिलती है भी नहीं भी ,
इनाद का इनाम बेशकीमती तो है जरुर ,
मगर तेरी इब्रत भरी इब्तिसाम सही है भी और नहीं भी ,
तेरे इश्क़ के इश्तियाक़ में , इस्बात ढूंढ रहा हूँ ,
मुझपे इश्फ़ाक़ करने वाले है भी और नहीं भी….

शीतलेश थुल !!

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 03/09/2016

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