जागीर की जंग

Sheetkashmir1
जागीर की जंग मुल्को को जुदा कर देती है ,
जुनून इस जफ़ा का जुर्म को मजबूर कर देती है ,
ज़दा-ए-मुल्क रोता ही है दोनों ओर ,
ये वो ज़रर है जो इंसानियत को ज़लील कर देती है ,
ऊपर बैठा ज़ाबित को ज़ियादा के जोश में, ज़बर से जर्जर कर देती है।
ज़फ़र-ए-कश्मीर,जमीन पर ज़र्ब छोड़ कर,
ज़ियारत की इस जन्नत को जहनुम कर देती है।

शीतलेश थुल !!

8 Comments

    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 02/09/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 02/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 02/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 02/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 03/09/2016

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