जुल्म और सितम – शिशिर मधुकर

उसके प्रेम की बरखा ने मेरा तन मन खिला दिया
बिछडी हुई तन्हा रूहों को आपस में मिला दिया

कब से जो तड़पा किए एक मुहब्बत की प्यास में
पहलू में अपनी चाहत का उन्हें अमृत पिला दिया

उम्मीद तो नही थी मुझे मिलेगा अब कोई सुकुन
कुछ पल के लिए उसने मुझे वह भी दिला दिया

जिनको नहीँ दरकार उनको क्यों देती है दुनियाँ
मेहरबान है वो जिसने मुफलिसो को जिला दिया

जुल्म और सितम मधुकर जहाँ में होते हैं बदनाम
पर सच में उन सब ने ही हमें ये सिलसिला दिया

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 02/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 02/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 02/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 02/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2016

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