आस्तित्व की पहचान

मेरे  आस्तित्व की पहचान मुझसे खो गयी है ,
मेरी जमीं आसमाँ सी दूर हो गयी है।

कल तक जिस जिंदगी को टूट कर चाहा था ,
आज वही जिंदगी जीने की चाहत क्या गयी है ?

इस कदर यूँ जीना बोझिल लगता था कभी ,
आज बोझिल जिंदगी ही जिंदगी हो गयी है।

मेरी आस्तित्व की पहचान मुझसे खो गयी है ,
मेरी जमीं आसमाँ सी दूर हो गयी है।

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 02/09/2016
    • Manjusha Manjusha 02/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2016
    • Manjusha Manjusha 02/09/2016

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