“लिखता तो वो आज भी है”

“लिखता तो वो आज भी है”

उन दीनो भी वो उसके लिए लिखता था…
इन दीनो भी वो सिर्फ़ उसके लिए लिखता है…

वक़्त की बेरहमी और कुच्छ बेगाना और दूर रास्ता..
ऐसी कयामत ढाई प्यार का साहिल भी टूट गया…

पगली प्यार तो आज भी है…बस अंदाज़ अलग है…
कह नही पाना उसकी मजबूरी है, और यकीन नही करना तुम्हारी.

कुछ तो था उसमे रंग ए सतरंगी मेघ धनुष का ..
ए, सतरंगी, ये मालूम नही था की बदल आते ही छिप जाना था तुझे..

यूँ तो हर मौसम बिजली नही चमकती..
और मेघधनुष भी नही होता..

क्या मौसम था वो…

बारिश भी उसकी ना र्ही ना रहा उसका सतरंगी..
बिजली ब चमक के बंद हो गई और उसके साथ बारिश..

प्यार तो वही है आज भी पगली, सतरंगी वाला जो हर किसिको नही दिखता
बारिश तो आज भी होती है,बस तेरे तक पहुँचने से पहले बादल खिसक जाते है…

बिजली तो आज भी चमकती रहती है बस तुम नही देख पाती..
लिखता तो वो आज भी सिर्फ़ उसके लिए ही है. बस……………

– Mayur Sindha

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2 Comments

  1. babucm babucm 02/09/2016

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