अश्रु – प्रियंका ‘अलका’

हे अश्रु के धार सुन
तू जो बह रहा अपार सुन
तू रोक अपनी रफ्तार सुन
है मेरी पीड़ा मौन जो
तू न दे उसे फुहार सुन
हे अश्रु के धार सुन ।

हे अश्रु के धार सुन
तेरा जो निर्मल सलिल है
उर में दबा दुख जटिल है
मन भी बोझिल है
तन भी बोझिल है
स्वपनों का रंग
पंकिल-पंकिल है
तेरा धार भी बड़ा हीं
चोटिल है
फूट-फूट कर
यूँ बहता है
क्या छिपाऊँ
क्या दिखाऊँ
उर को खाली कर देता है। ।

हे अश्रु के धार सुन
तू क्यों बहता बारमबार है
क्यों छलकाता पीड़ा हर बार है
तू बाँध मेरी पीड़ा को सुन
न कर मुझे
यूँ बेबस तू
बह-बह कर मेरे
अधरों को चूम
मेरे कंठो को अब न
बिंध तू
हे अश्रु के धार सुन ।

अलका

12 Comments

  1. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulatit 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  5. mani mani 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016

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