बोलो प्रिय- प्रियंका ‘अलका’

बोलो प्रिय
तेरी फैली दृगो में
आज कैसी उलझन
क्यों तेरी बातो की लड़ी का
आज टूटा स्पंदन।

उर में तेरी दबी है
आज कैसी पीड़ा
जो सुनकर मेरी बातो को
तू छन में भूला ।।

तेरी चहरे की मायूसी
अधरो पर फैली खामोशी
दृगो की राहें बुझी-बझी सी
प्रेम की बाँहें दबी -दबी सी
कर रहीं हैं मुझे व्यथित
दिख रही है तेरी
कोई नब्ज़ दुखित ।

बोलो प्रिय
अब बोल भी दो
चुपी का धैर्य
अब तोड़ भी दो ।।

तेरी पीड़ा की पीड़
कर रही मुझे अधीर
तू कह न कह
तू मान न मान
तेरी पीड़
है मेरी पीड़
एक बार जो खोलो
अपनी ह्रदय का द्वार
सारी पीड़ को
खींच-खींच
भर दूंगी उर में
प्रेम अपार ।

अलका

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 02/09/2016
    • ALKA ALKA 02/09/2016

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