ह्यूमन टच

क्या आपको नहीं लगता ? कि धीरे धीरे हम ,
अपनी जिंदगी से ह्यूमन टच,खतम करते जा रहे हैं।

पहले जो काम इंसान किया करतेथे ,
वह आजकल मशीन कर रहे हैं ,
हाँ काम तो बखूबी हो रहा है ,
मगर ह्यूमन टच ख़तम होता जा रहा है।

पहले जब हम अपनी कार में बैठ कर ,
शहर में या शहर से बाहर निकलते थे ,
तो जगह जगह पर कार रोक कर,
कभी रिक्शे वाले ,कभी ठेले वाले से,
रास्ता पूछा करते थे .

इस रास्ता पूछने की प्रक्रिया में,
कब वह रिक्शे वाला वाला
वह ठेले वाला हमारा भैया बन जाता था,
तब रास्ता बताने पर हम उसे ,
धन्यवाद देना भी नहीं भूलते थे ,
बिना अपने हैसियत की परवाह किए बगैर।

और आज जब अपनी आलिशान जीपीआर एस से
लैस कार में, सज धज कर
जब सड़क पर निकलते हैं ,
तो इस तरह रुक रुक कर रास्ता पूछना ,
कुछ ज्यादा ही बिलो स्टैण्डर्ड नजर आता है।

क्या आपको नहीं लगता ? कि धीरे धीरे हम ,
अपनी जिंदगी से ह्यूमन टच,खतम करते जा रहे हैं।

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • Manjusha Manjusha 01/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • Manjusha Manjusha 01/09/2016
  3. babucm babucm 02/09/2016
    • Manjusha Manjusha 02/09/2016
      • babucm babucm 02/09/2016

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