हीरा है सदा के लिए

भस्म कर दी हमने सारी इच्छाएं
हवन की ज्वाला बन छू ली दिशाएँ
धूँआ हो गया अहम का पाला
प्यार ने मुझे कोयला कर डाला

गर्द के अनगिनत पर्तों को कुरेद कर
तप के तोप से दिवारों को भेद कर
दूर हुआ सब दर्द, हरा हर पीडा
चमक उठा जब हृदय का हीरा

तराश कर निखार कर सँवरे रूप
प्रभु प्रेम की पा कर लुभावनी धूप
प्रकाशमान है आत्मा आंनद स्त्रोत लिए
अंतरमन में बसता हीरा है सदा के लिए

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • Uttam Uttam 01/09/2016
    • Uttam Uttam 01/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • Uttam Uttam 01/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 01/09/2016
    • Uttam Uttam 01/09/2016

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