बेरुखी सी दास्त्ता

आज बेरुखी सी है इन्न हवाओ मै
अब वो बात भी नही रही इन्न फिझाओ मै
बेवफाई का आलम ईस कदर च्हया है
कि मैने तुम्को पल भर मै खोया है
ऐसा धोखा देने कि क्या थी वजह
अब कैसे होगी प्यार भरी सुबह
लेकिन इस्स बार नही करुगा तुजे माफ
ये मै बताता हु साफ साफ
माफी मागने से सब कुच्ह थीक नहि हो जाता
एसे थोडीना कोई दिल का हाल जान पाता

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 01/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
  3. mani mani 01/09/2016

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