**उन्हीं तवायफों के कोठों पर::Er Anand Sagar Pandey**

****उन्हीं तवायफों के कोठों पर****

जिन तवायफों के सिर इल्जामों की फेहरिश्त लगी मिलती है,
उन्हीं के कोठों पे शहर भर की तहज़ीब टंगी मिलती है l

एक तवायफ़ से हुआ तार्रुफ़ तो समझ में आ गया,
वफ़ा आजकल इन्हीं के ही दिलों में छुपी मिलती है l

ये जो सफ़ेदपोश खुद को शरीफ़ कहते आ रहे हैं,
बेहयायी इनकी ही रग-रग में बसी मिलती है l

ये तमाम शहर ऐतबार की दुहाई देता है मगर,
यहां जिसपे ऐतबार हो उसी से ठगी मिलती है ll

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-Er Anand Sagar Pandey

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 01/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  5. mani mani 01/09/2016

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