नादान परिंदा………..

मैं आया नादान परिंदा अनजान की तरह !
लौट जाऊँगा एक दिन मेहमान की तरह !!

क्या सहरा,क्या गुलिस्ता, हूँ सब से वाकिफ
कट जायेगा ये भी सफर जाते तूफ़ान की तरह !!

ढूंढ कर अन्धकार में भी प्रकाश की किरण
पाउँगा मंजिल मैं मुसाफिर अनजान की तरह !!

ना करो ऐ दुनिया वालो मेरे ईमान को बदनाम
कहि हो न जाऊं मशहूर बेइमान इंसान की तरह !!

आकर चले जाना ही “धर्म” उसूल जिंदगी का
जब तक हो झनको सरगम की तान की तरह !!
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डी. के. निवातियाँ ________

20 Comments

  1. Vivek Sharma Vivek Sharma 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  3. mani mani 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  4. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  6. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
  8. Kajalsoni 12/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016

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