भार

भार सी एहसास होने लगी हैं
खाली जेंबे जैसे मानों
चन्द कदम भी चलना
मुश्किल सा लग रहा !

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016

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