बड़े हुए तो क्या हुआ।

बड़े हो गए तो क्या हुआ, दिल से बच्चा बन जाते हैं,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
नई उमंगें,नई तरंगे और नया जोश जगाते हैं,
बच्चों की तरह फिर से हम उछल कूद मचाते है,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
कभी बाग़ से आम तोड़कर,माली को खूब सताते हैं,
पेड़ के नीचे बैठकर फिर उन आमों को खाते हैं,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
कागज की कश्ती बनाकर पानी में तैराते हैं,
कबड्डी और खो खो का खेल फिर से खेल कर आते हैं,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
बच्चों को अपना शिक्षक बनाकर हम विद्यार्थी बन जाते हैं,
उनसे फिर बच्चा बनने की कला सीखकर आते हैं,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
टेंशन और चिंता को तजकर खुशियों का राग गुनगुनाते हैं,
अपने बच्चों के संग फिर से हम बच्चा बन जाते हैं,
चलो फिर से एक बार हम अपना बचपन जी कर आते हैं।
By:Dr Swati Gupta

12 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016

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