” जीवन मे इन्सान बनो “

इक ऐसा ऐलान करो , जीवन मे इन्सान बनो । कोई कह न सके किस धर्म के है , कोई कह न सके किस जात के है । इक ऐसा ऐलान करो , जीवन मे इन्सान बनो । क्या धर्म , क्या जात , क्या मजहब, क्या पात , मानवता को अपना धर्म बनाओ , सेवा को अपना कर्म बनाओ । इक ऐसा ऐलान करो , जीवन मे इन्सान बनो । मानव का जब जन्म लिया है, इसे सार्थक कर के दिखाओ , दुखीयों को अपना प्रित बनाओ, दीनों को अपना मित बनाओ , इक ऐसा ऐलान करो , जीवन मे इन्सान बनो । फिर कोई धर्म के नाम पर, कर न सके कोइ व्यापार, फिर कोई धर्म के नाम पर, कर न सके कोई अत्याचार, इक ऐसा ऐलान करो , जीवन मे इन्सान बनो ।

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  2. babucm babucm 31/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  5. कुशवाह विकास कुशवाह विकास 31/08/2016

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