गजल (बेटियाँ)

गजल बह्र 2122 2122 2122 212

अब हमारी सोच में बदलाव आना चाहिए
बेटियों को साथ लेकर घर बसाना चाहिए।।

सानिया साक्षी मिताली सिन्धु पीटी साइना।
देश का गौरव बनी सबको दिखाना चाहिए।।

इस धरा पर ईश का वरदान हैं सब बेटियाँ
फैज से आबाद सबका आशियाना चाहिए।।

बेटियों को कोख में जो मारते हैं वाल्दैन
जुर्म उनका खुलके सबके बीच आना चाहिए।।

बेटियों के जन्म पर जो शोक में हैं डूबते
असलियत से रूबरू उनको कराना चाहिए।।

बेटियों को कह रहे है जो पराया धन उन्हें
बेटियाँ बरकत दिलाती ये बताना चाहिए।।

बेटियों को मानते हैं अपशगुन जो नासमझ
बेटियों से है जहाँ रौशन सिखाना चाहिए।।

सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘ कुशक्षत्रप’

13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  2. Markand Dave Markand Dave 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016

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