एक थी गुड़िया

एक थी प्यारी सी गुड़िया ,
थी फ़ैशन की वह पुड़िया ,
यूह तो वह समझदार बड़ी थी ,
पर स्वभाव से थोड़ा हठी थी।

एक घटना ने उसके मन को दुखाया ,
उसकी पीड़ा कोई समझ न पाया।

मंडल आयोग ही हवा चली थी ,
हवा नही वह तोह आँधी थी ,
कितनो को वह उड़ा ले गयी ,
कितने घर वोह तबाह कर गयी।

एक घटना ने उसके मन को दुखाया ,
उसकी पीड़ा कोई समझ न पाया।

स्वआहुति बन गया था पैशन ,
जैसे हो कोई लेटेस्ट फ़ैशन ,
फ़ैशन की तो वह पुड़िया थी ,
वह उसकी जिद थी या था फैशन।

एक घटना ने उसके मन को दुखाया ,
उसकी पीड़ा कोई समझ न पाया।

12 Comments

    • Manjusha Manjusha 31/08/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • Manjusha Manjusha 31/08/2016
  2. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
    • Manjusha Manjusha 31/08/2016
    • Manjusha Manjusha 31/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
    • Manjusha Manjusha 31/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
    • Manjusha Manjusha 31/08/2016

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