वर्षाऋतु फिर आई है

नभ में छितरे ये बादल , कब उमड़-घुमड़ कर आएंगे ,
श्वेत से काले रूप बदल कर , तिमिर स्वरूप दिखलायेंगे |
फिर पवन शीतल बही, मेघो को संघनित कर लाई है ,
जल की बूँदों में गिरने की , वर्षाऋतु फिर आई है ||

—- कवि कौशिक

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • कवि अर्पित कौशिक 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  4. babucm babucm 31/08/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016

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