हम ना निठल्ले

“हम ना निठल्ले तनिक हमे बहुत काम है”
अपने ही घर में हम बदनाम है , हम ना निठल्ले तनिक हमे बहुत काम है |
नींद बहुत आती हमे है , रजाई में बहुत आराम है ||
मौसम का मिज़ाज़ जो बदला, आज फिर बहुत घाम है |
मिल जाये पकौड़ी और चाय , वही तो सुहानी शाम है ||
काम में रखा क्या है, ऑफिस तो यूँ ही बदनाम है |
हम ना निठल्ले तनिक हमे बहुत काम है ||

— कवि कौशिक

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • कवि अर्पित कौशिक 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • कवि अर्पित कौशिक 31/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
    • कवि अर्पित कौशिक 31/08/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016

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