रियो ओलिंपिक २०१६

१.) खेल खेल में जीत गए दिलों को वो सब नौजवान,
बिन सुख-सुविधा के लक्ष्य को पाना जैसे तीर बिन कमान |
जीते कोई या हारे से नहीं बने कोई महान,
देश की आन में खेले बस ऐसे ये नौजवान ||

२.) है चमक तमगे की ऐसी, हुक्मरां भी हिल गए |
नारी जाति के आलोचक, उनके मुँह भी सिल गए ||
देश की बेटी जो उतरी, खेल के मैदान में |
जीत के लहराया तिरंगा, देश के सम्मान में ||
अब न समझो बेटी को, कम न इस जहान में |
देश और बढ़ जायेगा, बस चल पड़ो बेटी बचाओ अभियान में ||

— कवि कौशिक

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • कवि अर्पित कौशिक 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  4. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016

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