मैं फिर से बच्चा बन जाऊँ

काश यदि ऐसा हो जाए,
समय का चक्र पलट जाए,
फिर से मैं बच्चा बन जाऊँ।
गुड़िया के संग फिर से खेलूं,
अपनी सहेलियों को मैं बुलाऊँ,
रस्सी कूदना, मस्ती करना,
तरह तरह के खेल खेलकर,
दिन भर हंसी के ठहाके लगाऊँ,
काश यदि ऐसा हो जाए,
समय का चक्र पलट जाए,
फिर से मै बच्चा बन जाऊँ।
जब भी बारिश छम छम बरसें,
मैं झूमझूम कर नाचूँ गाऊँ,
फिर कागज की नाव बनाऊं,
उसको पानी में तैराकर,
उछल उछल कर ताली बजाऊँ,
काश यदि ऐसा हो जाए,
समय का चक्र पलट जाए,
फिर से मैं बच्चा बन जाऊं।
कोई कड़वी यादें न हों,
न ही भविष्य की कोई चिंता,
बहन भाई के संग हंसी ठिठोली हो,
जादू की झप्पी पापा की,
और माँ की गोदी मिल जाए,
काश यदि ऐसा हो जाए,
समय का चक्र पलट जाए,
फिर से मैं बच्चा बन जाऊँ।।
By:Dr Swati Gupta

15 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  2. कवि अर्पित कौशिक 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  5. babucm babucm 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
  6. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016

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