जो खुद ना समझा,वो दुनिया को समझाना चाह रहा हू मैं…

जो खुद ना समझा,वो दुनिया को समझाना चाह रहा हू मैं
असफल रहा, फिरभी सफलता के बारे में बता रहा हू मैं
मंजिल क्यो दूर रही, हर बार, बस एक कदम मुझसे
चंद अल्फाजो में यही बताना चाह रहा हू मैं
असफल हू फिरभी सफलता के बारे में बताना चाह रहा हू मैं !!

उलझा रहा ज़िन्दगी भर किताबो में, कुछ इस कदर
सोचता था एक अच्छी ज़िन्दगी बना रहा हू मैं
पर जब से सिखा है ठोकार खा-कर सिखने की कला
कुछ ना कर के भी,सबकुछ पा रहा हू,किस्मत चमका रहा हू मैं
असफल हू फिरभी सफलता के बारे में बताना चाह रहा हू मैं !!

An attempt to express my thought, through above lines I want to say that only books are not enough for real life. One who is having art of understanding things from stumbled will definitely become successful. And most important thing is that I believe that a unsuccessful man can tell you about success is better than successful man because only he knows what was the lack.

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  4. babucm babucm 30/08/2016

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