मंजिल – बी पी शर्मा बिन्दु

वैसे तो जीत लेते हम दिल को प्यार से
पायेंगे जीत कैसे अब मंजिल को यार से।
यहाॅ आदमी से आदमी का काम नहीं है
खोजिये यहाॅ तो भी कहीं राम नहीं है।
हर भीड़ में रावण.दुशासन का भरमार है
यहाॅ रहते हैं शैतान हैवान का संसार है।
मुश्किल है जीत पाना महफिल को हार से
पायेंगे जीत कैसे अब मंजिल को यार से।
यहाॅ शासन.अनुशासन अब भ्रष्ट हो रहा
यहाॅ बचपन और जवानी भी नष्ट हो रहा।
रंगीनें दुनिया हुस्नंे इश्क का ये बाजार है
लोगों में पैसों और फैशन का भरमार है।
निकलेंगे बचके कैसे तलवार के धार से
पायेंगे जीत कैसे अब मंजिल को यार से।
बहरूपिये के वेश में अब ये कर्म खा गये
बेच दिये धर्म अपना और वे मर्म खा गये।
इंसान के इंसानियत भला कच्चे चबा गये
कमजोर है जो किसी से उसको दबा गये।
मुश्किल है बच पाना अब ऐसे खुमार से
पायेंगे जीत कैसे अब मंजिल को यार से।
सोता हुआ रहेगा कब तक ए वीर-नौजवान
खोते रहें जिंदगी क्या मजदूर और किसान।
दिखला देंगे अब दुनिया को हम सब एक हैं
आओ कसम खायें ऐसा कि हम सब नेक हैं।
क्या थक नहीं गये हो तुम अब इंतजार से
जीत पायेंगे अब सबको तुम्हारे ही प्यार से।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

12 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 30/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  2. babucm babucm 30/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/08/2016

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