२५. रोज मेरे सपनों में आकर…………|गीत| “मनोज कुमार”

रोज मेरे सपनों में आकर मुझको रोज जगाती है
देकर मुझको लाल रोज सब दिल के हाल सुनाती है
अपनी व्यथा अपना गम वो सब बेबाक कह जाती है
हम रह जाते है चुप ही पर वो चेहरा पढ़ जाती है

बीत गया जो दौर महोब्बत प्यार भरे जज्बातों का
ढूंड रहा हूँ वही अतीत अब प्यार भरे उन वादों का
जो बातें पनघट की थी वो वहीं खींच ले जाती है
आते जाते फिर कॉलेज की याद बहुत तडपाती है

रोज मेरे सपनों में आकर …………पढ़ जाती है

वो आइसक्रीम का खाना उसका फिर खाना उसका मेरा
फिर आधा आधा खाकर फिर बाँहों में सोना उसका
चले जाते फिर परीलोक परियों की बात सुनाती है
दो जानों का एक होना वो ऐसा किस्सा सुनाती है

रोज मेरे सपनों में आकर …………पढ़ जाती है

संग रहने की बात हमारी पूरी हुई अब शब्दों में
बेवफ़ा वो थी कभी ना ना होगी सात जन्मों में
हम है उसके वो है हमारी ये कहने वो आती है
वादा उसका टूट ना जाए इसलिए रोज जगाती है

रोज मेरे सपनों में आकर …………..पढ़ जाती है

“मनोज कुमार”

6 Comments

    • MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 01/09/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 01/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 01/09/2016

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