मुकाम….

किस मुकाम को निकले हैं आज…..
कोई हाथ में झोला,
तो कोई लिए हैं सर पर ताज ….
एक ओर हैं किसी को चारपाई…
तो दूसरी ओर हैं मखमल की रजाई …
कहीं नन्हे हाथ में थमी हैं किताब…
कहीं…… यही हाथ करते हैं,
काम- काज का हिसाब…..

किसी को भर पेट थाली हैं,
तो एक ओर कई पेट खाली हैं …
कोई हाथ जोड़कर नमन करता हैं…
तो कोई दुआ मांगता हैं……
कोई गिरजाघर तो कोई गुरूद्वारे जाता हैं……
यहाँ भिन्नताएं अनेक हैं..
पर सबका मुकाम एक हैं….
जहाँ जाता हरेक हैं…

उस मुकाम ही तो निकले हैं आज..
जहाँ हर धर्म, हर मजहब एक हैं….
बस….वही एक मुकाम हैं…
जहाँ उसका न्याय हर बच्चे के लिए समान हैं ….

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/08/2016

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