दिल की गली में हलचलों का नाम आहटें…. vinay bharat sharma

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दिल की गली में हलचलों का नाम आहटें

दिल की गली का जब कोई दरवाजा खुलता है
चितचोर कोई चोरी करने दिल में घुसता है
आंखों के रस्ते सीधा दिल में उतर जाता है
कितना भी बचो यार प्यार हो ही जाता है !!1!!

एक दिल का दूसरे से मिलना प्यार होता है
रातों में छुप के आहें भरना प्यार होता है
प्यार नहीं कोई किसी किताब की गज़ल
मिल के विछडना और रोना प्यार होता है !!2!!

दिल की गली में हलचलों का नाम आहटें
रातों में यादों का सैलाब नाम करवटें
दिल ही दिलों में तोडती दम कितनी हसरतें
दो दिल मिले समाज के माथे पे सलवटें !!3!
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दिल को लगाना कोइ बच्चों का खेल तो नहीं
ये दिल है कोई चायना की सैल तो नहीं
इसको लगाने वालों को रोना सदा पडता
दिल तोडने वालों के लिये जेल तो नहीं !!4!!

दिल तो है खाट्टा- मीठा सा ज्यों आम का अचार
दिल में ना फैला कोई यार अपने भ्रष्टाचार
ज़िंदगी में जवानी और दिल का ऐसा खेल है
मंज़िल है इसकी शादी मंडप इसकी रेल है!!

रचनाकार – विनय ‘भारत’

4 Comments

  1. babucm babucm 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  3. विनय भारत 30/08/2016

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