“कवी” जन्म जन्मांतर

एक कवी
जिसकी कल्पना
की कहानी
उसकी जुबानी
कागज़ के ढेर
मौसम के पेड़
गर्मी की बात
सुर्ख़ियों में आज
जीवन से दौड़
जीवनी की ओर
जूझता कठनाईयों से
लांघता उचाईयों को
पैसे चन्द कमाए
जो चंदा पे लुटाये
ख़ुद दहलीज़ पर
खड़ा निर्वस्त्र
हाथ कटोरा लिए
बना भिखारी
बात बेचता जो
अपनी जात की
एवज़ में कुछ मुहरें
फेंके गए ओर उसके
अंत से अनंत में
ग़ुम गया परिचय
मानसी स्मृतियां
पड़ गयी धूमिल
चलते पाँव अब
छाले लपेटे
कला और काल से
विभूति की ओर ,,,,,,,,,
28/08/2016 Abhinay Shukla

5 Comments

    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 30/08/2016
  1. C.M. Sharma babucm 30/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016

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