नीलामी……

the-human-impact-on-nature

इंसान से ज्यादा आज इंसानियत बदनाम होती है
जिस्म हँसता है बाहर ,रूह अंदर ही अंदर रोती है
पत्थर के भगवानो की होती दिन रात पहरेदारियां
इंसानो के जिस्म की यंहां नीलामी सरेआम होती है !!
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डी. के. निवातियाँ ________@@@

16 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  4. mani mani 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 31/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 01/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/09/2016

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