अब रास नही आते

हर मोड़ पर मिलते है यहाँ चाँद से चेहरे
पहले की तरह क्यो दिल को नही भाते ||

बड़ी मुद्दतो बाद लौटे हो वतन तुम आज
पर अपनो के लिए कुछ आस नही लाते ||

काटो मे खेल कर जिनका जीवन गुज़रा
फूलो के बिस्तर उन्हे अब रास नही आते||

किसान, चातक, प्यासो आसमा देखना छोड़ो
बादल भी आजकल कुछ खास नही आते ||

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  2. Kajalsoni 29/08/2016
    • shivdutt 29/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  4. C.M. Sharma babucm 30/08/2016

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