एक माँ बूढी सी (२९ अगस्त २०१६ )


एक माँ बूढी सी,
जाने कैसे गिर गई
शायद किन्ही ख्यालों में,
कहीं वो तो खो गई |

अपनी व्यथा विचारते-२ ,
सड़क पार कर गई
लकिन फिर भी एक बाइक से,
वो तो टकरा गई |

गिरने के बाद तो ,
वहीं बेहोश हो गई
कुछ लोगों की मदद्त से,
होश में तो आ गई |

होश आने पर भी,
वो तो चुप सी हो गई
कुछ न बताने को ,
वो तो मौन हो गई |

ज्यादां ही पूछने पर,
मुहँ तो खोल गई
डर की सारी व्यथा ,
मुंख से बोल गई |

यह सुन संजीदा तेरी,
आत्मा भी स्तब्ध रह गई
घर न जाने का ,
बहाना वो तो कर गई |

बहु बेटा का खोफ,
शब्दों में कह गई
यह सुन सारी जनता,
हैरान सी रह गई |

किसी तरह से घर जाने को,
माँ तो मान गई
लकिन कुछ न कहने का,
वादा हमसे ले गई |

जिंदगी से नया परिचय ,
हम सबका करा गई
मदद्त करने वालों को,
यथार्त सा दिखा गई |

Kamlesh Sanjida photo

Kamlesh Sanjida

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
  3. C.M. Sharma babucm 29/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  5. Kajalsoni 29/08/2016

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