मानव का धर्म

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सोच-समझ विचार कर देखो, क्या मानव का कर्म है ।
आतंकी कुरूपता को त्यागो, यह तो महा अधर्म है ।
मानव मन में ईश्वर है, जिसका प्रतीक है प्रेम विमल,
सबके हित की रक्षा करना, ही मानव का धर्म है ।
अभिषेक शर्मा अभि
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ffyy

7 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  4. C.M. Sharma babucm 29/08/2016
  5. shivdutt 29/08/2016
  6. Kajalsoni 29/08/2016

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