साया-I

SheetSaya1
एक अँधेरी रात, दिन के उजाले में बस यूँ ही घिर आयी ,
एक दस्तक दरवाजे की, धीमे से मेरे कानो तक चली आयी,
मैं बहकते कदमो से उस आहट की ओर बढ़ चला ,
दरवाजे तक पहुच मैंने बड़ी धीमी सी आवाज लगायी (कौन है ) ,
कुछ देर मैं मौन खड़ा फिर भी प्रतिक्रिया ना पायी ,
वहम होगा ये सोच के मेरा , मैंने बेफिकर गर्दन घुमायी ,
फिर से दस्तक दरवाजे की, धीमे से मेरे कानो तक चली आयी,
वहम बदल गया खौफ में मेरा , एक लड़की की चीखें दी सुनायी ,
मदद मदद की आवाज पुकारे, इक पल सन्नाटा छायी ,
मैं हाँथ जोड़ याद करूं प्रभु को , मन ही भीतर भीतर ,
मन बहलाऊ याद करूं मैं तीतर के दो आगे तीतर ,
फिर उसने दरवाजे की कुण्डी जोर जोर खड़कायी,
ले प्रभु का नाम दरवाजा खोल मैंने भी नजरे मिलायी ।
एक लड़की भीगी भागी सी, कपकपांती सी मेरी ओर बढ़ी चली आयी ,
क्या मैं कुछ देर यहाँ रूक जाऊ , उसने गुहार ये लगायी ,
मैंने हाँ में पलके झुकायी, वो मेरे घर अंदर को चली आयी ,
मैंने मन ही मन ये प्रार्थना लगायी ,
“वर्षा रानी, बड़ी सयानी,
बस बरसा यूँ भर-भर के पानी “

to be continue….

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
  3. babucm babucm 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/08/2016

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